घोड़ा-खच्चर संचालन से केदारनाथ यात्रा बनी अधिक सुगम

रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा इस वर्ष बेहतर प्रबंधन और सुदृढ़ व्यवस्थाओं के चलते सफलता की नई मिसाल पेश कर रही है। यात्रा शुरू होने के मात्र पांच दिनों के भीतर ही डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल, हेलीकॉप्टर, डंडी-कंडी के साथ-साथ घोड़ा-खच्चरों के माध्यम से धाम तक पहुंच रहे हैं, जिससे यात्रा सुगम और व्यवस्थित बनी हुई है।
यात्रा को सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के निर्देश पर पशुपालन विभाग द्वारा घोड़े-खच्चरों के संचालन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष रावत के अनुसार इस वर्ष 8,300 घोड़े-खच्चरों का फिटनेस परीक्षण किया गया है, जबकि 7,359 पशुओं का डिजिटलीकरण कर उनका पंजीकरण सुनिश्चित किया गया है। पंजीकृत पशुओं के माध्यम से ही श्रद्धालुओं के आवागमन और माल ढुलाई का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 19 हजार श्रद्धालु इन सेवाओं का लाभ उठा चुके हैं। पशुओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग पर 19 स्थानों पर गर्म पानी की व्यवस्था की गई है। इनमें 6 स्थानों पर निरंतर गर्म पानी उपलब्ध है, जबकि 13 स्थानों पर गीजर के माध्यम से यह सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे पशुओं को ठंड से राहत मिल सके।
घोड़े-खच्चरों के संचालन की निगरानी के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। बिना लाइसेंस और बीमा के संचालन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक नियमों के उल्लंघन पर तीन एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त सोनप्रयाग, गौरीकुंड, बड़ी लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट पर पशु चिकित्सालय संचालित किए जा रहे हैं, जबकि भीमबली में चेकिंग प्वाइंट स्थापित किया गया है। गौरीकुंड में घोड़े-खच्चरों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। राज्य सरकार की जारी एसओपी के तहत संचालित ये व्यवस्थाएं न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा को सुनिश्चित कर रही हैं, बल्कि पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रही हैं। समुचित प्रबंधन और सख्त निगरानी के चलते केदारनाथ यात्रा इस वर्ष अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सुगम रूप में संचालित हो रही है।

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