रुद्रप्रयाग में यूसीसी जैसा सख्त कानून भी नहीं रोक पा रहा बाल विवाह
रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में बाल विवाह थमने का नाम नहीं ले रही हैं। व्यापक जागरूकता अभियान और तमाम प्रयासों के बावजूद समाज में यह कुप्रथा गंभीर समस्या बनती जा रही है। चौंकाने वाली बात ये है कि महज दो दिनों के भीतर बाल विवाह का दूसरा मामला सामने आया है, जिसे विभागीय टीम की तत्परता से समय रहते रोक दिया गया। बता दें कि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद इस साल अब तक 26 बाल विवाह रुकवाए जा चुके हैं। ताजा मामले में खुद नाबालिग बालिका ने अपने परिजनों की ओर से गुपचुप तरीके से विवाह कराए जाने की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन को दी। यह सूचना मिलते पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन के अधिकारियों के कान खड़े हो गए।
सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी अखिलेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर वन स्टॉप सेंटर की टीम, बाल कल्याण समिति के पदाधिकारी एवं चाइल्ड हेल्पलाइन से जुड़े सदस्य तत्काल मौके पर पहुंचे। टीम में केंद्र प्रशासक रंजना गैरोला भट्ट, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष रंजू खन्ना, सदस्य ममता शैली, दलवीर सिंह रावत, केस वर्कर अखिलेश, सामाजिक कार्यकर्ता पूजा भंडारी और तिलवाड़ा चौकी से कांस्टेबल डीसी पुरोहित शामिल रहे।
शुरुआत में परिजनों ने टीम को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सख्ती बरतने पर सच्चाई सामने आ गई। बालिका की मां ने बताया कि देहरादून में पड़ोस के एक युवक से प्रेम प्रसंग और उसके नशे की लत के चलते, साथ ही लड़की की ओर से घर से भागने की धमकी देने के कारण उन्होंने जल्दबाजी में विवाह तय कर दिया था। जानकारी के मुताबिक, विवाह उसी रात होने वाला था और इसे गुपचुप तरीके से सीमित लोगों के बीच आयोजित किया जा रहा था। टीम ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध कानून की जानकारी दी और बताया कि इस अपराध में 2 साल तक की सजा और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। इसके बाद परिजनों ने तत्काल लड़के पक्ष से संपर्क कर बारात न लाने का निर्णय लिया और विवाह रोक दिया। साथ ही टीम ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रावधानों की जानकारी देते हुए सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी स्थिति में बाल विवाह न किया जाए। हैरानी की तमाम जागरूकता के बावजूद भी बाल विवाह के मामले कम नहीं हो रहे हैं। खासकर पहाड़ी जिलों में इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। खासकर रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ में बाल विवाह के मामले ज्यादा रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। बाल विवाह से बालिका के मेच्योर न होने की वजह से उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
