उत्कृष्ट शिक्षा की दिशा में उत्तराखंड का दमदार प्रदर्शनः डाॅ. धन सिंह रावत

देहरादून। विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी वर्ष 2024-25 की परफारमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स-2.0 (पीजीआई) रिपोर्ट में राज्य ने विभिन्न सूचकांकों में कुल 584.5 अंक प्राप्त कर देशभर में 15वां स्थान हासिल किया है। जबकि पिछले वर्ष उत्तराखंड पीजीआई रैंकिंग में 24वें स्थान पर था। इसके अलावा राज्य ने अपनी श्रेणी में जबदस्त सुधार करते हुये ‘आकांक्षी-1’ से ‘प्रचेष्टा-3’ श्रेणी में उत्कृष्ट राज्यों के साथ मजबूत उपस्थित दर्ज की है।
सूबे के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत के कुशल नेतृत्व व मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने पीजीआई रैंकिंग में शानदार सुधार पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुये कहा कि यह राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों, शिक्षकों की मेहनत और विभागीय अधिकारियों की सतत माॅनिटरिंग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यालयी शिक्षा में किये जा रहे सुधार अब धरातल पर नजर आने लगे हैं। डाॅ. रावत ने कहा कि इस वर्ष राज्य ने पीजीआई रैंकिंग में 15वां स्थान हासिल किया है जबकि विगत वर्ष राज्य का स्थान 24वां था। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र में किये गये व्यापक सुधारों के चलते राज्य ने पीजीआई रैंकिंग के मुख्य रूप से 6 डोमिन व 72 सूचकांकों में कुल 584.5 अंक अर्जित किये जो विगत वर्ष की तुलना में 58.2 अंक अधिक है। डाॅ. रावत ने कहा कि गवर्नेंस प्रोसेसेज, समानता एवं समावेशन, पहुंच तथा शिक्षक प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में राज्य ने बेहतर प्रदर्शन किया है। विशेष कर समानता एवं समावेशन क्षेत्र में राज्य ने 260 में से 222.2 अंक प्राप्त कर समावेशी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया। वहीं गवर्नेंस प्रोसेसेज में 78.5 अंक प्राप्त होना प्रशासनिक दक्षता और मजबूत माॅनिटरिंग व्यवस्था को दर्शाता है। इसी प्रकार पहुंच क्षेत्र में राज्य ने 80 में 64.7 अंक प्राप्त किये जो विद्यालयों की उपलब्धता, नामांकन तथा विद्यार्थियों की पहुंच में जबरदस्त सुधार को दिखाता है। आधारभूत संरचना  क्षेत्र में राज्य को 84.9, शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण क्षेत्र में 66.8 तथा लर्निंग आउटकम्स क्षेत्र में राज्य ने 67.4 अंक अर्जित किये। डाॅ. रावत ने कहा कि राज्य का ‘आकांक्षी-1’ श्रेणी से ‘प्रचेष्टा-3’ श्रेणी में पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिये निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इस श्रेणी में उत्तराखंड ने गोवा, गुजरात, तमिलनाडू और हरियाणा जैसे अग्रणी राज्यों के साथ उपस्थिति दर्ज की है, जो राज्य के लिये बड़ी उपलब्धि है। डाॅ. रावत ने कहा कि हमारा लक्ष्य राज्य की पीजीआई रैंकिंग को इकाई के अंक में लाना है, इसके लिये उन्होंने विभागीय अधिकारियों को विद्यालयों में आधुनिक सुविधाओं के विस्तार व डिजिटल शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिये, ताकि आधारभूत संरचना एवं लर्निंग आउटकम्स जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार हो सके। इसके अलावा उन्होंने यू-डायस प्लस, प्रबंध तथा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के मध्य और बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिये।

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