केदारनाथ धाम में पर्यावरण संरक्षण की मिसाल,

रुद्रप्रयाग। विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को लेकर जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ प्रभावी परिणाम दे रही है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान के तहत अब तक 7 टन सूखे कूड़े का सफलतापूर्वक संग्रहण और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा चुका है। यह पहल हिमालयी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभरी है।
नगर पंचायत केदारनाथ द्वारा हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन एवं सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से संचालित यह अभियान उपजिलाधिकारी ऊखीमठ एवं प्रभारी अधिकारी नगर पंचायत के निर्देशन में चलाया जा रहा है। विभिन्न संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से यात्रा अवधि के दौरान केदारनाथ धाम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा मिली है।
इस अभियान के तहत श्रद्धालुओं को विशेष बैग उपलब्ध कराए जाते हैं, जिनमें वे स्वेच्छा से लगभग 4 से 5 किलोग्राम सूखा कूड़ा एकत्र कर अपने साथ गौरीकुंड तक लेकर आते हैं। इसके बाद एकत्रित कूड़े का वैज्ञानिक एवं पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप अंतिम निस्तारण किया जाता है। इस कूड़े में मुख्य रूप से प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स एवं खाद्य पदार्थों के रैपर, पैकेजिंग सामग्री तथा अन्य सूखा अपशिष्ट शामिल होता है।
हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन श्रद्धालुओं को कूड़ा संग्रहण के लिए बैग उपलब्ध कराने के साथ गौरीकुंड में उसके सुरक्षित संग्रहण की व्यवस्था करता है, जबकि सुलभ इंटरनेशनल कूड़े के परिवहन एवं वैज्ञानिक निस्तारण की जिम्मेदारी निभा रहा है।
नगर पंचायत केदारनाथ के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि यात्रा अवधि के दौरान श्कैरी मी बैक पॉलिसीश् के माध्यम से अब तक 7 टन सूखा कूड़ा केदारनाथ धाम से गौरीकुंड लाकर उसका वैज्ञानिक निस्तारण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के सक्रिय सहयोग से यह अभियान लगातार सफल हो रहा है और भविष्य में भी इसे और व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा।
केदारनाथ धाम जैसे संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में यह पहल केवल स्वच्छता अभियान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की जनभागीदारी आधारित एक प्रभावी मुहिम बन गई है। जिला प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं के सहयोग से बाबा केदार की पावन नगरी को स्वच्छ, सुंदर, प्लास्टिक मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाए रखना है।

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