ठंड में भी जल रहे उत्तरकाशी में धरासू व मुखेम रेंज के जंगल

उत्तरकाशी। बारिश और बर्फबारी न होने से शीतकाल में ही वन क्षेत्र आग की चपेट में आ रहे हैं। नंदा देवी नेशनल पार्क के बाद उत्तरकाशी जिले के धरासू, मुखेम रेंज के जंगलों में लगातार आग की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे कई क्षेत्रों में जंगलों से धुएं का गुब्बार उठ रहे हैं। इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
देखा जाए तो बारिश और बर्फबारी न होने पर भी वनाग्नि के चलते अमूल्य वन संपदा के साथ वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। अब तक उक्त रेंज के जंगलों में लाखों की वन संपदा सहित वन्य जीवों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। शीतकाल में जंगलों में लगने वाली आग वर्षा से ही बुझती है, लेकिन बारिश नहीं हो रही है।
इस बार दिसंबर और जनवरी माह में अब तक बारिश नहीं हुई है। ऐसे में उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक आग पहुंच रही है। वन विभाग की तैयारियां भी आधी अधूरी साबित हो रही हैं। अब तक आग बुझाने के इंतजामों का भी कुछ अता-पता नहीं है। वन विभाग के पास आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। हालांकि, विभाग की ओर से जंगलों की आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। वन विभाग की टीम सर्दियों में धधकते जंगलों में आग बुझाने की कोशिश तो कर रही है, लेकिन जंगलों में आग भड़कने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
उत्तरकाशी वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी देवी प्रसाद बलूनी ने बताया कि- जंगलों में आग लगने के कारणों का पूरा पता नहीं चला है। लेकिन कुछ स्थानों पर कंट्रोल बर्निंग चल रही है। वनाग्नि को रोकने के लिए पूरा विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। विभागीय टीम कई जगहों पर दोपहर और रात में जंगलों में जाकर आग बुझाने का प्रयास भी कर रही है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड के वनों में आग लगने का ये कोई पहला मामला नहीं है। पिछले 6 दिन से नंदा देवी नेशनल पार्क में दुर्गम इलाकों में आग लगी हुई है। उस आग से विश्व धरोहर को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। अब वायु सेना को आग बुझाने के लिए बुलाया गया है। अब उत्तरकाशी के वनों में आग से चिंता बढ़ गई है।

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