हरिद्वार में मीट की दुकानें शिफ्ट होने का हिंदूवादी संगठनों ने किया स्वागत
हरिद्वार। नगर निगम की बोर्ड बैठक में कच्चे मीट की दुकानों को सराय में शिफ्ट करने का प्रस्ताव पास हो गया है। इस प्रस्ताव का हिंदूवादी संगठनों, साधु संतों और स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है। लेकिन मीट कारोबारी, निगम के इस फैसले से नाखुश हैं। उनका कहना है कि उन्हें बिना विश्वास में लिए मीट की दुकानों को आधी अधूरी तैयारी के साथ सराय में शिफ्ट करने की योजना बना दी है। जबकि जिस स्थान पर मीट की दुकानें बनाई जा रही हैं, वहां गंदगी है। वह स्थान शहर से सात किलोमीटर दूर है। इसके अलावा वहां स्लॉटर हाउस भी नहीं है। यदि वहां दुकानें शिफ्ट होंगी तो लोग वहां जाएंगे नहीं और उनका रोजगार प्रभावित हो जाएगा।
तीन दिन पूर्व हरिद्वार नगर निगम की बोर्ड बैठक में एक प्रस्ताव आया कि मांस की दुकानों को हरिद्वार शहर से बाहर सराय गांव में शिफ्ट किया जाए। भाजपा पार्षदों ने संख्याबल के अनुसार इस पर सहमति जताई। कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने इसका विरोध किया, लेकिन बैठक में यह प्रस्ताव पास हो गया। प्रस्ताव पास होने के बाद मीट कारोबारियों में नाराजगी है।
हरिद्वार के मोहल्ला कसाबन और बकरा मार्किट के मीट कारोबारियों का कहना है कि सराय गांव में कूड़ा निस्तारण प्लांट है। जहां पूरे शहर का कचरा पड़ता है। वहां इतनी दुर्गंध आती है कि लोग बिना मुंह ढके खड़े भी नहीं हो सकते। इसके अलावा वो स्थान शहर से दूर है। वहां रास्ते में जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा वहां हिंदू और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग दुकानों की व्यवस्था भी नहीं है। कटान के लिए स्लॉटर हाउस तक नहीं बनाया गया है। उनका कहना है कि वो वर्षों से मीट की दुकानें शहर से बाहर ही चलाते आ रहे हैं, इसलिए उन्हें शिफ्ट करने से पहले निगम प्रशासन को विचार करना चाहिए। निगम की बैठक में मीट की दुकानों को हरिद्वार शहर से बाहर शिफ्ट करने के फैसले का हिंदूवादी संगठनों और साधु संतों ने स्वागत किया है। लेकिन पके हुए मीट के होटल और रेस्टोरेंट को लेकर उनमें नाराजगी है।
श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने कहा कि ज्वालापुर और जगजीतपुर क्षेत्र में पके हुए मीट की दुकानें भी बंद होनी चाहिए। उन दुकानों से होम डिलीवरी तक होती है। जिस प्रकार उत्तर प्रदेश में मथुरा, वृंदावन में शहर से बाहर मांस मदिरा की दुकानों को शिफ्ट किया गया है, उसी तर्ज पर धर्मनगरी हरिद्वार में व्यवस्था बननी चाहिए। शहर में शराब की दुकानों को भी बाहर शिफ्ट करना चाहिए। कार्तिक जी महाराज ने भी पके हुए मीट की दुकानों और शराब की दुकानों को हरिद्वार शहर से बाहर शिफ्ट करने की मांग की है।
हरिद्वार के ज्वालापुर और जगजीतपुर क्षेत्र में मांस की दुकानें संचालित होती हैं। हालांकि, बायलॉज के अनुसार हरकी पैड़ी क्षेत्र से ये दुकानें बाहर हैं। लेकिन कुंभ और कांवड़ जैसे धार्मिक आयोजनों को देखते हुए निगम की बोर्ड बैठक में सभी दुकानों को शहर से बाहर शिफ्ट करने का प्रस्ताव पास हो गया है। निगम प्रशासन की ओर से सराय गांव में निगम की जमीन पर 56 दुकानें बनाई जा रही हैं। इन दुकानों में पुराने और लाइसेंस वाले मीट कारोबारियों को ही दुकानें आवंटित की जाएंगी। लेकिन मीट की दुकानों की संख्या बहुत ज्यादा है। क्योंकि निगम प्रशासन द्वारा पूर्व में कई बार बिना लाइसेंस वाले दुकानदारों के चालान काटे जाते रहे हैं।
