विधायक खजान दास, मदन कौशिक, भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा व राम सिंह कैड़ा को दिलाई शपथ
देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शुक्रवार को लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उत्तराखण्ड सरकार के मंत्रिपरिषद के नवनियुक्त मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे। राज्यपाल ने विधायक खजान दास, मदन कौशिक, भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा एवं राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद की शपथ दिलाई।
उत्तराखंड में चार साल बाद धामी कैबिनेट का विस्तार हो गया है। उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह (रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल) नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जिन विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई उनमें मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, भरत चौधरी, राम सिंह कैड़ा और खजानदास हैं।
चौत्र नवरात्रि के दूसरे दिन आज जहां मां ब्रह्मचारिणी की पूजा हो रही है तो वहीं उत्तराखंड की धामी कैबिेनट का विस्तार भी हो गया है। क्षेत्रीय और जातीय समीकरण के बीच संतुलन बनाते हुए पांच नए मंत्रियों को धामी कैबिनेट में आज शामिल किया गया है। दरअसल धामी कैबिनेट में 5 मंत्रियों के पद खाली थे। लंबे समय से इन पदों को भरने की अटकलें लगाई जाती रही थी। विधायक भी टकटकी लगाए मंत्री पद पाने की लालसा में 4 साल इंतजार करते रहे। आखिरकार 2026 के शारदीय नवरात्रि में उत्तराखंड बीजेपी के 5 विधायकों के मंत्री बनने का समय आ गया।
धामी सरकार में रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट के विधायक भरत चौधरी को मंत्री बनाया गया है। देहरादून की राजपुर विधानसभा सीट के विधायक खजानदास को भी मंत्री पद मिला है। इनके साथ ही हरिद्वार जिले की रुड़की विधानसभा सीट से विधायक प्रदीप बत्रा और हरिद्वार सीट के विधायक मदन कौशिक मंत्री बने हैं। नैनीताल जिले की भीमताल सीट से विधायक राम सिंह कैड़ा को भी मंत्री बनाया गया है।
अब चूंकि 2027 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव होने हैं तो इस मंत्रिमंडल विस्तार को क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की कोशिश माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिन पांच विधायकों को मंत्री पद के लिए चुना गया है, उनके पिछले चार साल के काम का रिकॉर्ड देखा गया है। जिनका रिकॉर्ड बेस्ट मिला है, उन्हें मंत्री बनाया गया है।
शपथ ग्रहण समारोह में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, रेखा आर्या, गणेश जोशी एवं सौरभ बहुगुणा, सांसद व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट और नरेश बंसल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने किया।
नवनियुक्त मंत्रियों को धामी ने दी बधाई
प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्रिमंडल का कोरम हुआ पूरा
देहरादून। उत्तराखंड राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले धामी सरकार ने मास्टरस्टॉक खेल दिया है। लंबे समय से प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें लगाई जा रही थी। इसी बीच धामी सरकार ने मंत्रिमंडल में खाली पांचों पदों को भर दिया है। जिससे प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्रिमंडल का कोरम भी पूरा हो गया है। वर्तमान सरकार के आखिरी यानी पांचवे साल में मंत्रिमंडल का विस्तार किए जाने से सभी अटकलें पर विराम लग गया है। ऐसे में वर्तमान सरकार के 4 साल पूरे होने पर 21 मार्च को हल्द्वानी में आयोजित होने वाले कार्यक्रम से पहले धामी सरकार ने तमाम विधायकों को बड़ी सौगात दी है।
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सरकार ने क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन को भी साधने का प्रयास किया है। शपथ लेने वाले जनप्रतिनिधियों में भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा, राजपुर रोड (देहरादून) से विधायक खजान दास, रुड़की से प्रदीप बत्रा, रुद्रप्रयाग से भरत सिंह चौधरी और हरिद्वार से मदन कौशिक शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन नेताओं का अनुभव, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक पकड़ न केवल मंत्रिमंडल को और सशक्त बनाएगी, बल्कि धामी सरकार की विकास की प्राथमिकताओं को भी नई गति मिलेगी। मंत्रिमंडल विस्तार के इस फैसले ने एक और संकेत साफ कर दिया है भाजपा अब उत्तराखंड में नेतृत्व को लेकर किसी प्रयोग के मूड में नहीं है। धामी केवल वर्तमान के मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति के केंद्र बिंदु बन चुके हैं। यही कारण है कि अब यह चर्चा केवल अटकलें नहीं, बल्कि एक संभावित रणनीति के रूप में देखी जा रही है कि 2027 का विधानसभा चुनाव भी धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नवनियुक्त मंत्रियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सभी लोग लंबे समय से राजनीतिक क्षेत्र और सामाजिक क्षेत्र में काम करते रहे हैं। साथ ही सबका दीर्घकालिक अनुभव भी है, ऐसे में उनके अनुभव का लाभ पूरे प्रदेश को मिलेगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो विकसित भारत का संकल्प है, उसे संकल्प को पूरा करने में उत्तराखंड राज्य अपना पूरा योगदान देगा। साथ ही इन सभी नवनियुक्त मंत्रियों का बड़ा योगदान होगा। इसके साथ ही बाबा केदारनाथ धाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संदेश दिया था कि वर्तमान दशक उत्तराखंड का दशक होगा, ऐसे में राज्य सरकार इस संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी कि ये दशक उत्तराखंड का हो, और उत्तराखंड हर क्षेत्र में आगे बढ़े।
सीएम धामी ने कहा कि उत्तराखंड के जन-जन तक विकास पहुंचे, प्रदेश के अंतिम छोर में खड़े हुए व्यक्ति को विकास का लाभ मिले और उसको आगे बढ़ने का अवसर मिले। ऐसे में हम सभी लोग एक साथ मिलकर एक टीम भावना के रूप में पूरी मंत्रिपरिषद राज्य के जन सेवा के प्रति समर्पित होकर काम करेगी। सीएम धामी ने कहा कि आगामी साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में एक साल का वक्त बचा हुआ है। इस दौरान मंत्रिमंडल को बहुत सारे काम करने हैं, जिसमें जो काम बचे हुए हैं, उनको समय से पूरा किया जाएगा। लिहाजा सरकार को जन- जन तक और घर-घर तक पहुंचना है।
राजपुर रोड विधानसभा सीट से खजान दास
सबसे पहले बात करें खजान दास की, जिनका राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ। देहरादून के राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र से विधायक खजान दास भाजपा में अनुसूचित जाति वर्ग के नेता के रूप में एक बड़ा चेहरा हैं। खजान दास भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार में शिक्षामंत्री भी रह चुके हैं। वो भारतीय जनता पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में वर्षों तक बूथ स्तर से संगठन को मजबूत करते रहे। सामाजिक मुद्दों खासतौर पर वंचित वर्गों के अधिकारों को लेकर उनकी सक्रियता उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाती रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में सड़क, पेयजल और शहरी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया।
रुद्रप्रयाग से भरत चौधरी
भरत चौधरी अपेक्षाकृत युवा चेहरों में शामिल नहीं हैं, लेकिन उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले भरत चौधरी ने संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। वे युवा मोर्चा से लेकर जिला स्तर तक सक्रिय रहे और पार्टी की नीतियों को युवाओं तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। विधायक बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उनकी साफ-सुथरी छवि और कार्यशैली ने उन्हें पार्टी नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा बनाया।
भीमताल से राम सिंह कैड़ा
राम सिंह कैड़ा का जीवन संघर्ष और ग्रामीण परिवेश से गहराई से जुड़ा रहा है। वे किसान परिवार से आते हैं और उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान गांव-देहात के मुद्दों को उठाकर बनाई। पंचायत स्तर से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें विधानसभा तक लेकर आया। जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। अपने क्षेत्र में सिंचाई, ग्रामीण सड़क और कृषि सुविधाओं के विस्तार को लेकर उन्होंने लगातार काम किया है। कैबिनेट में उनकी एंट्री को ग्रामीण और किसान वर्ग के प्रतिनिधित्व के तौर पर देखा जा रहा है।
हरिद्वार से मदन कौशिक
मदन कौशिक उत्तराखंड की राजनीति का एक जाना-पहचाना और अनुभवी चेहरा हैं। हरिद्वार से आने वाले मदन कौशिक कई बार विधायक रह चुके हैं और भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार में मंत्री पद भी संभाल चुके हैं और उसके बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनका राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक समझ और चुनावी रणनीति में पकड़ उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की श्रेणी में खड़ा करती है। हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों में उनका मजबूत जनाधार है, जो उन्हें एक प्रभावशाली नेता बनाता है।
रुड़की से प्रदीप बत्रा
प्रदीप बत्रा का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा ने स्थानीय राजनीति से शुरुआत की और नगर निकाय से लेकर विधानसभा तक अपनी पहचान बनाई। वे पहले कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन बाद में भाजपा में शामिल होकर अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया। क्षेत्रीय मुद्दों जैसे शहरी विकास, जल निकासी और व्यापारिक हितों को लेकर वे लगातार सक्रिय रहे हैं। उनकी जनसंपर्क शैली और क्षेत्र में मजबूत पकड़ उन्हें एक प्रभावी जनप्रतिनिधि बनाती है।
विपक्ष बोला चुनावी मंत्री मंडल का हुआ विस्तार
देहरादून। प्रदेश की राजनीति में बीते लंबे समय से कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाएं चल रही थी। उन चर्चाओं पर आखिरकार शुक्रवार को विराम लग गया। विपक्षी दलों का कहना है कि उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव में मुश्किल से 10 माह के आसपास समय बचा हुआ है, तब मंत्रिमंडल के इन पदों को क्यों भरा जा रहा है?
उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जयप्रकाश उपाध्याय ने उत्तराखंड मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री धामी अपनी कैबिनेट का विस्तार तब कर रहे हैं जब राज्य में चुनाव आ रहे हैं। उन्होंने कहा दरअसल धामी को उत्तराखंड के लोगों से कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए उन्होंने आगामी चुनाव के मद्देनजर अपनी कैबिनेट का विस्तार किया है। अगर वह राज्य के प्रति संवेदनशील होते तो अपने 13 मंत्रियों को 4 वर्ष पूर्व समय पर शपथ दिलाते। अपने विभागों का आवंटन करते।
उत्तराखंड क्रांति दल ने भाजपा और मुख्यमंत्री से राज्य की जनता को श्वेत पत्र जारी किए जाने की मांग उठाते हुए कहा कि गत चार वर्षाे से मंत्रिमंडल का विस्तार क्यों नहीं किया? यूकेडी ने सवाल उठाया कि मंत्रिमंडल विस्तार की याद अब कैसे आई? अब उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार किया जब भाजपा के संगठन में विद्रोह की स्थिति पैदा हो गई? दल का मानना है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार से राज्य की जनता को कोई लाभ नहीं होने जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भाकपा माले के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि अन्ततः उत्तराखंड में भाजपा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया गया है। पिछले कई वर्षों से भाजपा सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार भेड़िया आया वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा था। लेकिन आज पांच नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल मे शामिल किया गया है। इन पांच मंत्रियों में से तीन विधायक ऐसे हैं, जो दूसरी पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए हैं, लेकिन अहम सवाल है कि क्या मंत्रिमंडल विस्तार उत्तराखंड राज्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया है? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। उन्होंने कहा अगर सरकार की मंशा ऐसी होती तो 2022 में ही मंत्रिमंडल के रिक्त पद भर दिये जाते। अब जबकि उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को 10 महीने के आसपास का समय बचा है, ऐसे वक्त में मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया है।
उन्होंने कहा 2022 में मंत्री पद इसलिए रिक्त रखे गए, ताकि भीतर के असंतोष को थामा जा सके। उन्हें यह आस रहे कि अगर मंत्रिमंडल का विस्तार होगा तो उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। अब आखरी साल में सरकार का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, तब मंत्री बनने की आस लगाए लोगों का असंतोष फूटकर बाहर आने लगा। भाजपा के सांसद और विधायक लगातार सार्वजनिक रूप से अवैध खनन,भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था पर बयान देने लगे। उसी असंतोष को मैनेज करने के लिए पांच मंत्री बनाए गए हैं।
