उत्तराखंड में एसटीएफ ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट का किया भंडाफोड़
देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाले गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस, एक अवैध सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल .30 बोर और पांच जिन्दा कारतूस बरामद किए गए हैं।
उत्तराखंड एसटीएफ के अनुसार इस अवैध शस्त्र लाइसेंस बनाने वाले इस गिरोह के तार उत्तराखंड के अलावा, उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक जुड़े हुए हैं। एसटीएफ ने गुरुवार देर रात आरोपी मनोज निवासी जनपद शामली हाल निवासी प्रेमनगर देहरादून को एक अवैध पिस्टल और पांच जिन्दा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया है। उत्तराखंड एसटीएफ एसएसपी नवनीत भुल्लर ने बताया कि उनकी टीम को पिछले कुछ समय से सूचना मिल रही थी कि बाहरी राज्यों से अपराधी किस्म के लोग फर्जी तरीके से अवैध शस्त्र लेकर उनका फर्जी लाइसेंस प्राप्त कर उत्तराखण्ड की शस्त्र पंजिका में दर्ज करा रहे हैं। इस खबर को पुख्ता करने और कार्रवाई के लिए एक टीम का गठन किया गया।
टीम ने जिलाधिकारी कार्यालय देहरादून, मेरठ और सिरसा आदि राज्यों से पत्राचार कर जानकारी की। प्राप्त सूचनाओं आदि से शस्त्र लाइसेंस नंबर 3805 का जिला मेरठ से ट्रांसफर होने के बाद साल 2020 में जिलाधिकारी कार्यालय देहरादून की शस्त्र पंजिका में अंकन होना पाया गया।
इस सम्बन्ध में और अधिक जानकारी की गई तो पता चला कि शस्त्र लाइसेंस जनपद मेरठ में भी जनपद सिरसा से ट्रान्सफर होकर आया था। जनपद सिरसा से जानकारी करने पर पता चला कि ये शस्त्र लाइसेंस जनपद सिरसा जिलाधिकारी कार्यालय से कभी जारी ही नहीं हुआ था, जिस पर टीम ने कार्रवाई करते हुए प्राप्त सूचना के आधार पर लाइसेंस धारक मनोज को केहरी गांव थाना प्रेमनगर क्षेत्र देहरादून से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के दौरान पता चला है कि बाहरी राज्यों से फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाकर उत्तराखंड राज्य के कई जनपदों में दर्ज कराए गए हैं। गिरफ्तार आरोपी से उत्तराखंड राज्य के जिलाधिकारी कार्यालय की शस्त्र पंजिका में दर्ज कराए गए फर्जी लाइसेंसों और संलिप्त व्यक्तियों के बारे में जानकारी कर आगे कार्रवाई की जायेगी। एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही जनपद देहरादून में धोखाधड़ी, बलवा और जान से मारने की धमकी आदि के मुकदमे भी पंजीकृत हैं। साथ ही अन्य राज्यों और जनपदों से आरोपी के आपराधिक इतिहास की भी जानकारी की जा रही है।
